महावितरण से सेवा निवृत्ति के कुछ महिने पहले से ही मन मे विचार आता था कि रिटायारमेंट के बाद क्या करुंगा ? लेकिन एक चीज तय कर चुका था कि अपने आप को समाज की सेवा मे अर्पण करना है. महावितरण और महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडळ मे सेवा के दौरान अभियंताओं के संगठन ( SUBORDINATE ENGINEERS ASSOCIATION) के साथ मिलकर बहुत से सामाजिक कार्य करने का मौका मिला था.
सेवा निवृत्ती के तुरंत बाद कोरोना काल मे लगभग घर पर ही समय व्यतीत होता गया, और कोरोना की समाप्ति के बाद मन मे ये खयाल आया की नेत्रदान को लेकर समाज मे जागरूकता निर्माण करने का कार्य किया जा सकता है. फिर क्या था, मोबाइल उठाया एक मेसेज बनाया और पुराने साथियों को भेज कर अपनी भावनायें व्यक्त कर दी, सभी की तरफ से उत्साहवर्धक मेसेज प्राप्त होते ही उन सभी के समर्थन से 12 ऑगस्ट 2021 को रौशनी फाउंडेशन की स्थापना हुई. रौशनी फाउंडेशन की स्थापना मे मेरे पुराने मित्र श्री दिलीप भटवडेकर,श्री नवल टावरी, श्री दिलीप चक्रबोर्ती ,श्री विजय भांडारकर, श्री भागीरथ साहू, श्री मधुकर बेळूलकर,श्री विजय तिवारी,श्री अरविंद क्षत्रिय ,श्री सतीश खेकाळे, श्री प्रमोद सस्ते, श्री विनय टेकाडे,श्री अनिल माटे, श्री मधु वनकर, श्री सुरेश अगळे, श्री श्रीधर दफ्तरी ,स्व.र्श्री अरुण राव, श्री तुषार किरोलीकार, श्री जीवन मेश्राम, श्री अनुपम शुक्ला, श्री प्रभाकर दाणी, श्री अरुण मते, श्री सुरेश गंधेवार,श्री विलास अलकरी, स्व.श्री मनोहर मारोतकार, श्री सुभाष नाफडे, श्री यादव लक्षणे , श्री गजानन पाटील, श्री अशोक गजापुरे श्री कैलाश धानुका, श्री दशरथ कळंबे ,श्री वसंत पाटील,श्री वासुदेव घुगल, श्री विनायक कुचनकर, श्री अरुण गभने, श्री रमण सिरोही, श्री दीपक ठाकुर,श्री माणिक बालगुडे, श्री अनिल इंदाने, श्री दीपक लाबडे, श्री मनसुख पटेल, श्री मोहन जोगी , श्री पद्माकर गोमेकर,श्री विजय मानकर,श्री कुलदीपक भस्मे ,श्री जैनेन्द्र भगत, श्री कुंवर प्रताप भगत, इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. 22 अगस्त 2021 को हुई सभा मे इस ग्रुप का नाम “रौशनी फाउंडेशन” रखा गया.
चुंकि नेत्रदान के विषय पर हमको जानकारी सिर्फ इतनी थी कि मृत्यु के पश्चात नेत्रदान होता है, और हम किसी ऐसे डाक्टर की तलाश मे थे जो कि इस विषय मे हमे जानकारी दे सके. एक दिन गुगल पर नेत्रदान के वीडियो सर्च करते वक्त डा. वरदा गोखले, माधव नेत्रालय के एक वीडियो पर नजर पडी, हमारे निवेदन पर, एक गुगल मीट के द्वारा डा. वरदा गोखले से रौशनी फाउंडेशन के सदस्यों से चर्चा हुई, तथा अनेक शंकाओं का समाधान हुआ.
24 नवंबर 2021 माधव नेत्रालय मे रौशनी फाउंडेशन के सदस्यो द्वारा सामुहिक रूप से नेत्रदान का संकल्प लिया गया .
25 नवंबर 2021 को रौशनी फाउंडेशन के एक सदस्य स्वर्गीय श्री मनोहर बी. मारोतकार का उनके परिवार द्वारा करवाया गया नेत्रदान रौशनी फाउंडेशन का पहला नेत्रदान था .रौशनी फाउंडेशन की पहल पर अब तक 16 व्यक्तियो ने मरणोपरांत नेत्रदान जैसा पवित्र कार्य किया है तथा अब तक 1600 से भी अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प कर चुके हैं. अब तक हुये अधिकतर नेत्रदान मे श्री सुरेश जैन “डायमंड”ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
लगभग एक साल का वक़्त लोगो को जोडने मे कब निकाल गया पता ही नही चला लेकिन एक वर्ष मे नेत्रदान के विषय मे थोडी बहुत जानकारी हो चुकी थी, इसलिये अब बारी थी शिविर लगाकर लोगों को भी नेत्रदान के विषय मे जानकारी दी जाये और इसी सिलसिले मे हमने पहला शिविर महात्मे आई बँक और अधीक्षक अभियंता, महावितरण शहर विभाग के सहयोग से 6 सितम्बर 2023 को आयोजित किया. रौशनी फाउंडेशन अब तक नागपुर ,भंडारा, वर्धा, चंद्रपुर, वरोरा ,उमरेड, बुटीबोरी,सावनेर,हिंगणा, कलमेश्वर, उरुळी कांचन,भोपाल और रायपुर मे भी शिविर लगा चुकी है.
युवाओ मे भी नेत्रदान को लेकर जागरूकता निर्माण करने के उद्देश्य से कालेज और स्कूलो मे भी शिविर लगाये गये है. रेडीओ स्टेशन, पॉवर स्टेशन, समाचार पत्र, कारखानो,मंदिर,गुरुद्वारा,और चर्च मे भी रौशनी फाउंडेशन ने 50 से अधिक शिविर लगाकर समाज के हर क्षेत्र मे नेत्रदान को लेकर जागरूकता निर्माण करने का प्रयास सतत जारी है.
